अस्तित्व

                            कहानी
‌                           अस्तित्व
‌मीरा शून्य सी नजरो से आसमान में टकटकी लगाए देख रही थी।जीवन की आपाधापी में उम्र के पचास बसंत देख चुकी उसकी अवस्था उस गुलमोहर के भांति थी ।जो गर्मी की तपन सहकर भी अपनी रंगत बिखेरते हुए खिलखिलाई रहती ।आज बार बार उसकी आंखे सजल हो रही थी। किंतु अश्रु लुढ़ककर गालो पे झलके उस से पूर्व ही वह उन्हें अपनी कोरो में समेटने का प्रयास कर रही थी।यही तो उसके स्वभाव का हिस्सा रहा है ।मन के भीतर चल रहे आंतरिक द्वंद को उसके  चेहरे की खोकली हसी ने कभी उजागर नहीं होने दिया ।प्रकृति ने भी सारे समझौते ,समर्पण ,सहनशीलता ,जैसे तोहफे नारी के दामन में डालकर उसे पूज्यनीय बना दिया । वहीं दूसरी ओर उसे बार बार अवहेलना का शिकार कर आहत किया जाता है ।सीता को अग्नि परीक्षा देकर अपनी पवित्रता का प्रमाण देना पड़ा वहीं द्रोपदी को भरी सभा में चीरहरण कर अपमानित किया गया।कितनी ही महान नारियों को कठिन दौर से गुजरना पड़ा तो आम जगह वह शोषित होने से कैसे बच पाएगी।
‌कुशाग्र बुद्धि की स्वामिनी मीरा हर क्षेत्र में निपुण थी ।विवाह उपरांत सास _ससुर की सेवा सुश्रुषा ,बच्चे ,और घरके कामो में उलझी  रहती ।उसके सारे कला गुण जैसे धूमिल हो गए।नारी को अपनी चरम सार्थकता मातृत्व में ही लगती है।उसकी दुनिया चार दीवारोंके इर्द  गिर्द सिमटकर रह गई ।उसे काम में व्यस्त देख पतिदेव अपने दोस्तो के साथ कभी सिनेमा देख आते तो कभी कहीं घूमने चले जाते साथ चलने का ना उन्होनें कभी आग्रह किया नाही मीरा ने जिद ।समझौता करने की जैसे आदत सी पड़ गई।उसकी आंखो में बच्चो के उज्जवल भविष्य के सपने सजने लगे। और वह उन्हें आकार देने में मशगूल थी।सास ससुर की वृद्धावस्था के चलते बीमारियां और बच्चो की जिम्मेदारियों  के बोझ तले वह इतना अधिक दब गई स्वयं की इच्छा आकांक्षाओं को विकसित करने का समय ही नहीं मिलता।उपर से रिश्तेदार और पतिदेव से यह उलाहना जरूर सुनने मिलती मीरा को घर के कामों के अलावा और कोई चीज में दिलचस्पी नही है ।यह सुनकर वह आहत हो जाती।अपनी हम उम्र महिलाओं को देखती जो बच्चो को आया और ट्यूशन के भरोसे छोड़ स्वयं किटी पार्टी ,सिनेमा ,होटल और खरीददारी में व्यस्त रहती।मीरा को  इस तरह की जीवनशैली बच्चो के खातिर कतई गवारा नहीं थी।उसकी लगन और बच्चो के परिश्रम का नतीजा सकारात्मक ही रहा ।बेटा इंजीनियर और बेटी डॉक्टरों हो गई।दोनों मेट्रो सिटी में अपनी अपनी नौकरी में व्यस्त हो गए ।इसी बीच सास ससुर भी परलोक सिधार गए।जिंदगी मानो ठहर सी गई।खाली समय का कैसे सदुपयोग किया जाए  बस यही सोचना जारी था।तभी बेटे अनुज का फोन आया वह अपने साथ कार्यरत किसी साथिदार को जीवनसंगिनी के रूप में पसंद कर चुका था । यह खबर मन में जरा हलचल कर गई।किन्तु बच्चो की खुशी के खातिर हमने रजामंदी की मोहर लगाना ही उचित समझा ।
‌अनुज   ने कोर्ट मैरज  कर लिया  ।इस शहर में सभी परिचित होने से हमने एक रिसेप्शन का आयोजन किया था।पंधरा दिन घरमे काफी चहलपहल रही।समय केसे पंख लगाकर उड़ गया पता ही नहीं चला।मन में अब स्वयं के कलागुनो को विकसित कर व्यक्तित्व निखारने की लालसा
‌जाग उठी।तभी बहू अनन्या पेट से है यह खुश ख़बर मिली डॉक्टर ने बेडरेस्ट का कहा था।दादी बनने की खुशी और अपने कर्तव्य बोध को ध्यान में रखकर ।मनमे उठी लालसा को फिर दफना दिया ।और पति पत्नी दोनों अनन्या की देखरेख के लिए मुंबई पहुंच गए।बहू ने फ्लैट बहुत सलीके से  सुसज्जित कर रखा था।गर्भावस्था के दौरान अनन्या ऑफिस के सारे काम घरसे ही निपटाने में व्यस्त थी।रात में सभी साथ बैठते बतियाते कभी राजनीति के मुद्दों पर तो कभी बजट पर ,कभी वैज्ञानिक संसाधनों के नित नए अविष्कारों पर देश दुनिया की बाते होती।मेरे मन में भी कुतूहल रहता सब जानने का आज की दुनिया से कदमताल मिलाकर चलने का ।किन्तु जैसे ही वार्तालाप बढ़ते जाता बाप बेटे में से कोई कुछ ना कुछ फरमाइश कर ही देते ।कभी कॉफ़ी तो कभी ज्यूस ।और में तो एकमात्र केंद्रबिंदु थी सबके इच्छापूर्ति की।बहू से जरूर सम्मान मिलता किन्तु वह कुछ कहे इसके पहले ही बेटे और पतिदेव कह देते मा को इस चीज का ना तो ज्ञान है ना ही दिलचस्पी ।यह सुन मन आत्मग्लानि से लबरेज हो जाता।भीतर ही भीतर आज क्रोधाग्नि सुलग रही थी।सबको कॉफी देकर में कमरे में सोने चली गई।किन्तु आज आंखो में नींद नहीं अपनेे सपनों को साकार करने का दृढ़ संकल्प था।नारी के त्याग को उसके विशाल हृदय द्वारा किए समर्पण को जो अज्ञानता का ताज पहनाया जाता है ।उस अज्ञानता के टैग को हटाने का दृढ़ निश्चय में कर चुकी थी।दूसरे दिन की भोर मुझे ढेरो आशा की किरणे सौगात रूप में दे रही थी।बहू मेरी मनोदशा भाप चुकी थी ।उसके द्वारा मिले सहयोग से मेरी राह और आसान हो गई।जिससे में अपना अस्तित्व बनाने की और अग्रसर हो गई ।बहू ने अखबार में पहले ही इश्तहार दे दिया था ।जिससे काफी लड़कियां अलग अलग चीजों को सीखने की चाहत लिए मेरे पास आ गई ।मेरे कलागुनो  पर जमी धूल की परत साफ हो चुकी थी। नए आत्मविश्वास से मेरा चेहरा दमक उठा ।
‌राजश्री राठी  "श्री"
‌अकोला (महाराष्ट्र)

Comments

  1. Very nice story 👌😊😊😀
    True life of women 💯💯💯
    You are great writer Rajshree👍👌👌😊😊
    Keep it up 👍👌👌

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