बाजी
लॉकडाउन के दरमियान फुरसत के चंद लम्हे तोहफे के रूप में मिले । श्रीमतीजी जितना कहती उसके कामो में सहायता करने के पश्चात रोजाना तो वर्क फ्रॉम होम रहने से व्यस्त ही रहता किन्तु आज इतवार होने से समय की कमी नहीं थी कुछ देर सुस्ताने की सोच ही रहा था तभी अनु किचन से बोल रही थीं खाली हो तो खुदकी अलमारी ही ठीक करलो ।में भी सोचा जरूरी फाइलं ,दस्तावेज सलीके से रख देते है तभी नजर पुराने अलबम पर पड़ी ।और एक एक कर सारी पुरानी यादें ताजा कर गई।पांच साल हॉस्टल में रहा वह समय जिंदगी का अविस्मरणीय समय ही है।मम्मी _पापा का लाडला तो बचपन से ही रहा इसलिए बारहवीं के पश्चात जब शहर छोड़ने का समय आया तो घरसे दूर रहना मुश्किल लग रहा था। पर मम्मी पापा ने मुझे लेकर जो सपने संजोए थे उन्हें पूरा भी करना जरूरी था ।पिलानी के इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन हो चुका था। मेरी सफलता के पीछे मम्मी पापा का भी योगदान था उनकी भी रात दिन की मेहनत थी ।दिल पर पत्थर रखकर बमुश्किल मम्मी ने अपने आसुओं के सैलाब को रोक रखा था जिसे में समझ चुका था इसलिए मैने भी अपनी भावनाओं को संयत रख हसते हसते घर से बिदाली।
कॉलेज का स्वच्छंद माहौल और अखिल जैसा रूम मेट रहने से मुझे कोई परेशानी नहीं हुई ।दो साल कैसे मस्ती में बीत गए पता ही नहीं चला ।पढ़ने के साथ साथ में कॉलेज की हर गतिविधियों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता जिस से सभी का चहेता था।मेरे दोस्त पढ़ाई के सिलसिले में मेरे रूम में आते ही रहते ।दो साल में हुए हर सेमिस्टर में अपना अव्वल स्थान मैने कायम रखा। उसी दौरान श्रीनगर से हेमांगी प्रथम वर्ष की छात्रा कॉलेज में आयी । सीनियर रहने से कुछ ना कुछ समझने के लिए तो कभी अपनी समस्याओं के समाधान हेतु वह मेरे पास आते रहती। हिम सी उसकी कंचन काया ,बोलते नैना,और रेशम सी लहराती जुल्फे भगवान ने बड़े फुरसत मेंउसे घड़ा था ।उसकी खूबसूरती का में ऐसा कायल हुआ कि उसकी झलक पाने की लिए हरपल मन में लालसा रहती।
जब भी वह कोई प्रश्न का हल सुलझाने मेरे पास आती वह क्षण मुझे ऐसा गुद गुदा जाता कि उस खुशी को शब्दों में बयां करना संभव ही नहीं लगता।मेरे मित्र जब उसके साथ मेरा नाम जोड़ते तो मुझे बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल होने सा महसूस होता। एकबार कॉलेज के इम्तिहान के दौरान उसकी तबीयत खराब हो गई मैने रातो जगकर उसके प्रैक्टिकल कंप्लीट किए।ताकि वह कहीं पिछड़ ना जाए।इसमें मेरे पढ़ाई का में नुकसान कर रहा था और वह में समझ भी रहा था पर वह जुनून ऐसा था कि बस .......।
नतीजतन मेरा पॉइंटर घसर गया अखिल मुझपर बरस पड़ा ।मेरे जैसे छात्र का इस तरह पिछड़ना उसे गवारा नहीं था। अगले सेमिस्टर में टॉप करके दिखाऊंगा ऐसा कह मैने अखिल को झुटी तसल्ली दे दी।रात दिन उसकी छवि आंखो में घर किए थी ।में यहां किस मकसद से आया वह भी भूल रहा था। एक दिन उसे कैंटीन में साथ कॉफी पीने का ऑफर दिया जिसे उसने मुस्करा कर स्वीकार कर लिया उसके मन के भाव जाने बिना में खयाली पुलाव पकाने में मशगूल हुआ जा रहा था ।दो _चार बार इसी तरह मिलते रहे फिर एक दिन हिम्मत जुटाकर मैने अपना प्रेम प्रस्ताव उसके समक्ष रख दिया जिसे बड़ी शालीनता से उसने ठुकरा दिया।मेरे ऊपर जैसे बिजली का आघात हुआ।मेरे अरमानों पर पानी फिर गया में तो जैसे पूरी तरह टूट चुका था।ना पढ़ने में मन लगता ना भूख प्यास लगती ।इम्तिहान सिर पर थे आखिर में असफल रहा ।ना प्यार की बाजी जीत पाया नाही अपने कैरियर को अंजाम देने का सपना साकार हुआ पूरी तरह हारे हुए खिलाड़ी सी हालत आजतक असफलता का स्वाद कभी चखा ही नहीं था । डिप्रेशन में ऐसा गया की उभर नहीं पाया रोजाना रात मै और अखिल कैंटीन में साथ कॉफी पीने जाते ।मन ही मन मैंने योजना बना ली आज अखिल को किसी तरह टाल दूंगा और अपनी जीवन यात्रा को विराम दे दूंगा। रात होने का इंतजार ही कर रहा था अखिल ने कहा भी चल कॉफी पीकर आते है मैने सिरदर्द का बहाना बना दिया गुस्से में वो कहने लगा पड़ा रह देवदास बनकर में जा रहा ।मैने दरवाजे की कुण्डी बन्द की टेबल को सरकाया पतली चादर पंखे से बांधी फिर सोचा अभी अखिल को आने में समय लगेगा यह सोच कुण्डी खोल दरवाजा लगा रहने दिया।में बस चादर गले में बांध ही रहा था उतने में अखिल प्रवेश कर गया वह झ ट टेबल पर चढ़ा।और पूरे बल के साथ मुझे नीचे धकेल दिया ।गुस्से में आगबबूला अखिल ने दो चार चांटे मेरे मुंह पर रसीद दिए ।भगवान का लाख लाख शुक्रिया अदा कर रहा था वो तो उसका कोई फोन आ गया था इसलिए वह बात करने में उलझ गया ।जेब में देखा तो वॉलेट नहीं था इसलिए वह रूम में आया वरना आज अनर्थ हो जाता ।कुछ पल में लिए निर्णय कभी सर्वनाश कर देते है ।अखिल के आंखों में खून उतर आया था और मै शर्मसार अपराधी के भांति चुप्पी साधे खड़ा था।कुछ पल सन्नाटा छाया रहा ।फिर मौन को तोड़ते हुए अखिल समझाने लगा शेखर अपना शहर छोड़कर इतने दूर तुम किस लक्ष्य से आए थे ?नए नए हुए चार दिन के प्यार के खातिर जान की बाजी लगा रहे थे,और सच तो वह प्यार था ही नहीं हेमांगी ने तो तुमसे दोस्ती ही स्वयं के स्वार्थ सिद्धि के लिए की थी।तुम्हारे मम्मी पापा ने ना जाने क्या क्या सपने देखे है ।उनकी तो खुशी की शुरुवात ही तुमसे शुरु होकर तुम पर ही खत्म हो जाती है। हो सकता है विधाता ने कोई बेहतरीन जीवनसाथी तुम्हारे लिए ढूंढ रखा हो ।समय के साथ साथ गहरे से गहरा घाव भर जाता है।एक इम्तिहान में असफल होने से तुम जिंदगी की बाजी हार गए यह मत सोचो । उठो सबकुछ भूलकर अपनी जंग जितने कि कोशिश करो हौसला बुलंद है तो जीत पक्की है। अखिल को याद कर आंखे नम हो रही थी । तभी मेरी नन्ही परी पापा पापा के नारे लगाते हुए कमरे में आ गई उसकी बाहों का हार मेरे गले में डाल वह झुला झुल रही थी तभी अहसास हुआ अगर जीवन का अंत कर देता तो यह सुखद पल खो देता ।यह खुशियां तो अखिल से सौगात में मिली है उसकी बदौलत जिंदगी की बाजी में जीत चुका था ।
राजश्री राठी
अकोला
I like your lekh
ReplyDeleteVery nice story
ReplyDeleteA true friend is worth family👬
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